जयशंकर प्रसाद

अधि विकिपीडिया, एकः स्वतन्त्रविश्वविज्ञानकोश
अत्र गम्यताम् : सञ्चरणं, अन्वेषणम्

जयशंकर प्रसादः (Jayshankar Prasad) (1889-1937) हिन्दी भाषाया: महान् लेखक: ।

उदाहरणकविता[सम्पादयतु]

बीती विभावरी जाग री!

बीती विभावरी जाग री!

अम्बर पनघट में डुबो रही

तारा घट ऊषा नागरी।

खग कुल-कुल-कुल सा बोल रहा,

किस लय का अंचल डोल रहा,

लो यह लतिका भी भर लाई

मधु मुकुल नवल रस गागरी।

अधरों में राग अमंद पिये,

अलकों में मलयज बंद किये

तू अब तक सोई है आली

आँखों में भरे विहाग री।

- जयशंकर प्रसाद

पश्‍य[सम्पादयतु]

बाहरी कड़ियां[सम्पादयतु]

"http://sa.wikipedia.org/w/index.php?title=जयशंकर_प्रसाद&oldid=243395" इत्यस्माद् पुनः प्राप्तिः