जयशंकर प्रसाद

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गम्यताम् अत्र : पर्यटनम्, अन्वेषणम्

जयशंकर प्रसादः (1889-1937) हिन्दी भाषाया: महान् लेखक: ।

उदाहरणकविता [सम्पादयतु]

बीती विभावरी जाग री!

बीती विभावरी जाग री!

अम्बर पनघट में डुबो रही

तारा घट ऊषा नागरी।

खग कुल-कुल-कुल सा बोल रहा,

किस लय का अंचल डोल रहा,

लो यह लतिका भी भर लाई

मधु मुकुल नवल रस गागरी।

अधरों में राग अमंद पिये,

अलकों में मलयज बंद किये

तू अब तक सोई है आली

आँखों में भरे विहाग री।

- जयशंकर प्रसाद

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