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सदस्यः:Jagyansini das

विकिपीडिया, कश्चन स्वतन्त्रः विश्वकोशः

            काव्यलक्षणानि                                                 १.  आचार्यविश्वनाथस्य मते- "वाक्यं रसात्मकं काव्यम्।"

अर्थात् –केवलं रुचिपूर्णं वाक्यं काव्यं भवति ।  सः काव्ये रसं मुख्यतत्त्वं मन्यते स्म।

            अन्यान्यलक्षणानि

२.  मम्मटस्य मते- “तदद्षौ शब्दार्थो सगुणावनलङ्कृती‌ पुनः क्वापि।"

३. भामहमते :-"शब्दार्थो सहितौ काव्यम्।"

४.  जगन्नाथस्य मते :-"रमणीयार्थप्रतिपादिकः शब्दः काव्यम् ।"

५.  दण्डिमते -"शरीरं तावत् इष्टार्थव्यवच्छिन्ना पदावली।"

६.  आनन्दवर्धनाचार्यस्य मते-"काव्यस्यात्मा ध्वनिः।"

७.  जयदेवमते :- "निर्देशा लक्षणवती  शरीतिगुणभूषणासालङ्‌काकररसानेकवृत्तिवाक्काव्यनामभाक्।"

८.  अग्निपुराणस्य मते-"इष्टार्थव्यवच्छिन्ना पदावली । काव्यं          स्फुरदलङ्कारं गुणवदोषवर्जिनम् ।"

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