सदस्यसम्भाषणम्:Parambrahmapati
विषयः योज्यताम्अस्ति हस्तिनापुरे कर्पूरविलासः नाम रजकः | तस्य गर्दभः अतिभारवाहनात् दुर्बलः मुमुर्षुः इव अभवत् | तत: तेन राजकेण असौ व्याघ्रकर्मणा प्रचद्य अरण्यसामीपे सस्याक्षेत्रे मोचित: | ततः दुरत् अवलोक्य व्याघ्रबुद्धया क्षेत्रपतयः सत्वरं पलयन्ते | सः च सुखेन सस्याम कैरति | अथ एकदा केन अपि सस्यरक्षकेण धूसरकम्बलकृततनुत्राणेन धनुष्काण्डं सज्जिककृत्य अवनतकयेन एकान्ते स्थितम् | तम च दूरेस्त्वा गर्दभः पुष्टिंगः गर्दभि इयं इति मत्वा शब्दम् कुर्वाणः तदभिमुखं धवितः | तत: तेन सस्यारक्षेन गर्दभ: अयं इति ज्ञात्वा लीलया एव व्याप्तित: | अत: अहम् ब्रवीमि |
सुचिरं हि चरण मौनं श्रेयः पश्यति अबुद्धिमान | द्वीपकर्मपरिचन्नः वाग्दोषात् गर्दभः हतः |
हस्तिनापुर में कर्पूरविलास नाम का एक धोबी था। उसका गधा भारी बोझा ढोने के कारण दुर्बल होकर मरने को हो गया था। इसलिए उस गधे को बाघ की खाल ओढ़ाकर धोबी ने जंगल के पास के खेत में छोड़ दिया। दूर से गधे को देखकर किसान बाघ समझकर भाग गए। वह गधे ने मजे से अनाज चरा। फिर एक बार एक किसान ने भूरे रंग का कम्बल ओढ़ लिया और धनुष-बाण लेकर नीचे झुककर खड़ा हो गया। उसे दूर से देखकर और गधी समझकर वह पली-बढ़ी गधी रेंकती हुई उसकी ओर दौड़ी। तब किसान ने रेंककर जान लिया कि यह गधी है, इसलिए उसने उसे आसानी से मार डाला। इसलिए मैं कहता हूँ,
अर्थात्; जब आप लंबे समय तक शांति में रहें तो सुरक्षा के झूठे भ्रम में न रहें। अनावश्यक रूप से अपना मुंह न खोलें। भले ही आपके शरीर पर बाघ की खाल हो, लेकिन अगर आप गधे की तरह रेंकेंगे तो आपकी पहचान हो जाएगी।]
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