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सम्भाषणम्:Maharaja ranjit singh

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विषयः योज्यताम्
विकिपीडिया, कश्चन स्वतन्त्रः विश्वकोशः

रणजीत सिंह का जन्म सन 1780 में गुजरांवाला (अब पाकिस्तान) में हुआ था। उन दिनों पंजाब पर सिखों और अफगानों का राज चलता था जिन्होंने पूरे इलाके को कई मिसलों में बांट रखा था। रणजीत के पिता महा सिंह सुकरचकिया मिसल के कमांडर थे। पश्चिमी पंजाब में स्थित इस इलाके का मुख्यालय गुजरांवाला में था। छोटी सी उम्र में चेचक की वजह से महाराजा रणजीत सिंह की एक आंख की रोशनी जाती रही। महज 12 वर्ष के थे जब पिता चल बसे और राजपाट का सारा बोझ इन्हीं के कंधों पर आ गया। शुरुआत में तो विरोधियों ने इनके खिलाफ कई अभियान चलाए, जब एक न चली तो थक हार कर इन्हीं को नेता कबूलने के लिए विवश हो गए। महाराजा रणजीतसिंह ने सारे सिख धड़ों को एकसू़त्र में पिरोया। 12अप्रैल 1801 को रणजीत ने महाराजा की उपाधि ग्रहण की। गुरु नानक के एक वंशज ने उनकी ताजपोशी संपन्न कराई। उन्होंने लाहौर को अपनी राजधानी बनाया और सन 1802 में अमृतसर की ओर रूख किया। महाराजा रणजीत ने अफगानों के खिलाफ कई लड़ाइयां लड़ीं और उन्हें पश्चिमी पंजाब की ओर खदेड़ दिया। अब पेशावर समेत पश्तून क्षेत्र पर उन्हीं का अधिकार हो गया। यह पहला मौका था

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